दोस्ती या प्यार 11

दीपाली वहां से निकली राघव के पीछे थी मगर राघव उसे बाहर नज़र आया तो वो घर को निकल गयी | कोमल के ना कहने के बाद अब दीपाली अपने प्यार को पाने के लिए फिरसे स्चाने लगाती हैं उसने तय कर लिया था की इस बार वो राघव को नही खोएगी और  अपने प्यार का इजहार भी कर देगी |

उधर राघव फिर से कैन्टीन के लिए वापस मुदा मगर दरवाज के पास से ही वापस हो गया |

इधर सारे फ्रेंड्स कोमल की बात सुनकर सब बड़ाई करते हुए घर को निकल गए देखते देखते फ्रेशेर पार्टी का भी दिन आ गया सबने अपनी तयारी कर ली थी | सबको कुछ ना कुछ सप्राईज मिलाने वाली थी मगर अपने देवदास तो कहीं खोया पड़ा था | सब तैयार हो कॉलेज पहुच गए थे एक एक कर के हर कोई अपना परफॉरमेंस स्टेज पे दे रहा थे तभी हाल में अँधेरा छा गया और एक फोकस लाइट जली स्टेज पे जहाँ पे राघव खड़ा था |

राघव ने माइक संभाला और बोलना शुरू किया "दोस्तों मैं स्टेज पे आ गया मगर क्या करू ये नही समझ, मैं विकास की तरह कवि भी नही हूँ, जो सुन्दर सी काविता सुना दू जैसा कि अभी वो आकर सुनायेगा | दूसरो की कविता नही सुना सकता क्योकि मेरे किस मित्र ने मुझे बताया कि अगर किसी से कुछ कहना हैं तो अपने शब्दों से कहो |

दोस्तों मैं अपने दिल की बात किसी के दिल तक पहुचना चाहता हूँ मगर कैसे पहुचाओ ये मुझे नही समझ में आ रहा हैं |" ये बोल के राघव कुछ देर के लिए चुप हो गया और राघव के इस बात से जहाँ दीपाली का दिल एक बार फिर उसे खोने के दर से रो पड़ा वोहीं कोमल चौक पड़ी कहीं राघव उसे सबके सामने परपोस्ज ना कर दे | सारे दोस्त राघव का इस तरह स्टेज बाते करने का सोच में पद गए थे |

राघव : "दोस्तों अब बातों को ज्यादा लम्बा नही खिचुगा अब यहाँ तक आया हूँ तो दिल के बात तो कहना ही, मुझे नही पता था की मैं इस लायक हूँ किसी के दिल की धड़कनों में मेरा नाम धड़कता हैं, कोई हैं जो मुझसे इतना प्यार करता हैं|"

"कोमल"

जब राघव ने कोमल का नाम लिया तो उसके होश ही उड़ गए और दीपाली की आँखों से आसूं बहन शुरू हो चूका था और वो नही बैठना चाहती और उठके वहां से चलाना शुरू कर चुकी थी |

राघव :"कोमल मैं तुम्हारा धन्यवाद करना चाहुगा की तुम्हारी वजह से मुझे उसके बारे में पता चला | दीपाली तुम कहाँ चली, तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो तो क्या आज के मेरे इतने बड़े दिन मेरे साथ नही रहोगी"

दीपाली तब ताकि गेट तक पहुच चुकी थी मगर राघव की बात सुनकर, अपने आंसू  को पोछ कर अपनी दोस्ती का फर्ज निभाने के लिए स्टेज की तरह बाद चली | दीपाली जब स्टेज की सीढिया चढ़ रही थी तभी राघव ने बोलना शुरू किया:

"दीपाली तुमने हर समय मेरा साथ दिया, तुमने हर पल मेरे साथ खंडी रही परिस्थिति चाहे जैसी रही हो | आज तो तुम्हारा साथ रहना ज्यादा जरुरि हैं | दोस्तों अब जब दीपाली भी मेरे साथ हैं तो मैं उसी लड़की अपने दिल की बात आप सबके सामने कहना चाहुगा |"

दीपाली राघव के बगल में पहुच तो गयी थी मगर राघव की ये बात सुनकर अपने आंसू को छुपाने के लिए आंख बंद कर के  खंडी हो गयी तभी उसे राघव की आवाज सुने दी;

"मैंने बहुत परेशां किया उसे और अब शायद रुसवा न कर दू मगर मैं उससे दिल की बात कहे बिना रह भी नही सकता, आज तक तुम्हे परेशान करने के मुझे माफ़ कर देना, मुझे अब अहसास हुआ की मैं तुमसे कितन प्यार करता हूँ I Love my life, my love" अभी राघव ने इतना ही बोला था की कोमल ने भी अपने आंखे बंद कर ली और दीपाली की आँखों से आंसू तेजी से बहाने शुरू हो गए थे | राघव ने तभी अपनी बात पूरी की

"I love my life, my love दीपाली"
अपना नाम सुनते ही दीपाली ने आंखे खोली तो देखा राघव हाथो में लाल गुलाब लिए , अपने घुटनों पे बैठे उसकी तरफ देख रहा था दीपाली रोते हुए वोही राघव के सामने घुटनों पे बैठ गयी और उसे बाँहों में भरते हुए बोली "कमीने जान ही निकल दी थी मेरी तूने तो"

कोमल दीपाली का नाम सुनकर सकूँ मिला और वो समझ गयी कल राघव ने सबकी बात सुन ली थी, दीपाली के बोलने में राघव बोला "कमीना तो हूँ और इस कमीने की जान अब इस कमीनी में हैं तो भगवन भी लेगे उसे जब तक मैं हूँ मुझे जवाब चाहिए"

दीपाली : "तो मेरे कमीने को जवाब चाहिए मैं तो तुमसे तब से प्यार करती हो जब से खुद को जाना हैं मेरे रोम रोम बस तुमसे प्यार करता हैं" ये कहते हुए दीपाली ने अपने अपने होठ राघव के होठ पे रख दिया दोनों भूल चुके थे वो कहाँ पे हैं|

"लैला मजनू जगह तो देख लो अपना रोमांस कहीं और जाकर करू " विकास ने कहते हुए दोनों पे हँसाने लगा जगह और अपने स्थिति का घ्यान आते ही दीपाली वह से भाग खंडी हुई जाकर पूजा की गोद में अपना मुह छुपकर बैठ गयी |

"खुलम खुला प्यार करेगे हम दोनो ये समंझा, ज्यादा हंस मत और अपना पर्फोर्मंसे दे ये कहकर" ये कहकर राघव भी जाकर दीपाली के बगल बैठ गया और दीपाली अपना चेहरा राघव के कंधे पे रख स्टेज पे खड़े विकास को देखने लगी | और विकास ने बोला शुरू किया "दोस्तों आज जो कविता मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ ये मेरी सबसे पहली कविता हैं जो मैंने अपने प्यार को देख कर लिखा था ,आप सब मुझे देवदास बुलाते हो मगर जिसकी पारों ऐसी हो वो देवदास क्यों न बने और मुझे ये पक्का यकीं हैं की जिस तरह ये देवदास अपनी पारों को खोज रहा हैं मेरी पारों को भी मेरी तलाश होगी वो भी मुझे खोज रही होगी" येकहने के साथ ही विकास ने अपनी अपनी कविता सुनानी शुरू की  
                                                   "उसकी जुल्फों के तले जिंदगी बितानी हैं
दूर जो देखे हैं लब मुस्कुराते हुए
उस मुस्कराहटको अपने जिंदगी में लानी हैं
कितने रंग हैं उसकी निगाहों में
उन रंगोंसे अब जिंदगी सजानी हैं
उसकी जुल्फों के तले जिंदगी बितानी हैं
दोनों के बीच एक ख़ामोशी सी ठहेरी हैं
करके इजहारे मुहब्बत अपने नैनू से
एक अनूगूंज से ये ख़ामोशी मिटानी हैं
उसकी जुल्फों के तले जिंदगी बितानी हैं"

विकास की कविता सुनकर हर किसी के खूब जोर से तालियाँ बजायी मगर कोई था जिसके आँखों में आंसू और होठ पे मुस्कान थे |

कौन हैं ये ? आपको पता चलेगा बहुत जल्द

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